उत्तर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस संगठन को नई धार देने के उद्देश्य से पार्टी ने तीन ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की है। गुरु घासीदास ब्लॉक की कमान मिलिंद गौतम को सौंपी गई है, जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू ब्लॉक में सुजीत सिंह और वीरांगना अवंति बाई ब्लॉक में कमल धृतलहरे को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है।

इन नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा गुरु घासीदास ब्लॉक के नवनियुक्त अध्यक्ष मिलिंद गौतम को लेकर है। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव रह चुके मिलिंद गौतम उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और असम जैसे राज्यों में प्रभारी के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी में समायोजित किया जाना था, लेकिन सीनियर कांग्रेस में दूसरी पारी की शुरुआत जमीनी स्तर से करने की इच्छा जताते हुए उन्होंने स्वयं ब्लॉक अध्यक्ष बनने का आग्रह किया था।
मिलिंद गौतम को उत्तर विधानसभा का सबसे ताकतवर ब्लॉक अध्यक्ष इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि उनके ब्लॉक के अंतर्गत चार मंडल आते हैं, जबकि उत्तर विधानसभा के अन्य दो ब्लॉकों में केवल दो-दो मंडल हैं। इससे संगठनात्मक दृष्टि से गुरु घासीदास ब्लॉक की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ गए हैं। इस ब्लॉक का पूर्व में नेतृत्व कांग्रेस नेत्री दीपा बग्गा कर रही थीं, जिनका कार्यकाल संतोषजनक बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें जल्द ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
वहीं वीरांगना अवंति बाई ब्लॉक के नवनियुक्त अध्यक्ष कमल धृतलहरे निगम चुनाव में पार्षद टिकट के प्रमुख दावेदार रह चुके हैं। लंबे समय से ब्लॉक अध्यक्ष बनने के प्रयासरत रहे कमल धृतलहरे को पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता माना जाता है और फाफाडीह क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है। गुटीय राजनीति से दूर रहते हुए वे संगठन के व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते हैं।
कांग्रेस में पहली बार मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ पार्टी को जमीनी स्तर पर पहले से अधिक मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे आगामी चुनावों में संगठन को सीधा लाभ मिलेगा।
हालांकि, इन नियुक्तियों के बीच गुटीय राजनीति भी खुलकर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों की तैनाती में विधानसभा उम्मीदवार माने जा रहे एक गुट का लगभग सफाया हो गया है। वहीं उत्तर विधानसभा के एक ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद भी उभरा है। पार्टी के अंदरखाने से संकेत मिल रहे हैं कि देर-सबेर कांग्रेस नेतृत्व इस गलती को सुधारते हुए संबंधित ब्लॉक अध्यक्ष को बदल सकता है।
कुल मिलाकर उत्तर विधानसभा में हुए इन संगठनात्मक बदलावों ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और आगामी रणनीति—दोनों को नई दिशा दे दी है।

