कुत्तों का आतंक: 12 महीनों में सरकारी अस्पतालों में खपे पौने दो लाख एंटी रेबीज डोज

कुत्तों का आतंक: 12 महीनों में सरकारी अस्पतालों में खपे पौने दो लाख एंटी रेबीज डोज

रायपुर: प्रदेश में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) के नाम पर की जा रही कार्रवाई सिर्फ दावों तक ही सीमित नजर आ रही है। राजधानी समेत पूरे राज्य की सड़कों पर आज भी आवारा कुत्तों का कब्जा बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि बीते वर्ष 2025 में केवल राजधानी के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में ही डॉग बाइट के शिकार करीब 5 हजार लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन के डोज लगाने पड़े।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कुल 1 लाख 73 हजार से अधिक एंटी रेबीज वैक्सीन डोज की खपत हुई। स्ट्रीट डॉग की संख्या में कमी न आने के कारण मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन का स्टॉक बढ़ाया गया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) द्वारा इस बार वैक्सीन की अतिरिक्त खरीदी भी की गई है।

आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए बधियाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा। ठंड का मौसम शुरू होते ही गली-मोहल्लों में कुत्तों के शावक दिखाई देने लगे हैं, जिससे अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजधानी में स्ट्रीट डॉग नियंत्रण का पूरा जिम्मा मात्र सात लोगों की टीम पर है। इस टीम में दो वेटनरी डॉक्टर, चार डॉग कैचर और एक ड्राइवर शामिल हैं। इनके द्वारा रोजाना औसतन 10 कुत्तों का ऑपरेशन किया जाता है, जबकि आंकड़ों के अनुसार शहर में 40 से 45 हजार तक आवारा कुत्ते मौजूद हैं।

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