छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी बाघों की दहाड़,

छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी बाघों की दहाड़,

छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही बाघों की दहाड़ और गूंज सुनाई देने वाली है। प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके तहत मध्यप्रदेश के कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से 6 बाघों को छत्तीसगढ़ शिफ्ट करने की तैयारी है। इनमें 1 नर और 5 मादा बाघिन शामिल होंगी। ये बाघ उदंती-सीतानदी और गुरू घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में बसाए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ वन विभाग की योजना के मुताबिक, कान्हा नेशनल पार्क से 1 नर और 2 मादा बाघ लाकर गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा। वहीं, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से 3 बाघिन को कोरिया जिले के गुरू घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में बसाने की तैयारी है।
यह निर्णय नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की तकनीकी समिति की बैठक के बाद अंतिम रूप लेगा। हालांकि, बाघों की शिफ्टिंग से पहले प्रे-बेस स्टडी कराना जरूरी होगा, ताकि जंगल में शिकार की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

उदंती और तमोर में बाघों की सुरक्षित शिफ्टिंग के लिए वन विभाग ने पहले से ही चीतल और जंगली सूअर को शिफ्ट कर प्रे-बेस मजबूत करना शुरू कर दिया है।
राजनांदगांव वन मंडल के मनगट्टा जंगल से 93 चीतल
नवा रायपुर बॉटनिकल गार्डन से 24 जंगली सूअर
को गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया है। इसके अलावा, जंगल सफारी से 150 चीतलों को उदंती-सीतानदी रिजर्व भेजने की मंजूरी दी गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक शिकार की पर्याप्त संख्या नहीं होगी, तब तक बाघों को नया क्षेत्र अनुकूल नहीं लगेगा। इसी कारण प्रे-बेस स्टडी को अनिवार्य किया गया है

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने 7 अगस्त 2024 को गुरू घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के गठन को मंजूरी दी थी। लगभग 2829.38 वर्ग किलोमीटर में फैला यह रिजर्व अब देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बन चुका है। यह इलाका पहले से ही वन्यजीवों से समृद्ध है और यहां बाघों के लिए बेहतर आवास और विस्तार की संभावना है।

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