व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा

व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा

बचपन से संगीत के प्रति समर्पण
मिथलेश्वरी सेन का संगीत से जुड़ाव कोई संयोग नहीं, बल्कि उनके जीवन की आत्मा है। बचपन में वे अपने पिताजी के साथ रामायण और भजन कार्यक्रमों में जाया करती थीं। वहीं से उनके मन में संगीत के बीज अंकुरित हुए। उनके पिता ने न सिर्फ उन्हें संगीत से परिचित कराया, बल्कि खुद उन्हें सिखाया और हर कदम पर मार्गदर्शन किया।

आरंभ में उन्होंने एक रामायण मंडली में कोरस गाना और हारमोनियम बजाना शुरू किया। धीरे-धीरे वह मंच पर गाने लगीं और अपने आत्मविश्वास के साथ एक नई पहचान बनाईं। समय के साथ उन्होंने अपना खुद का रामायण दल तैयार किया, जिसमें वह खुद गायन करतीं और किसी और को कथा के लिए आमंत्रित करतीं।
लेकिन जीवन ने उन्हें एक ऐसा मोड़ दिखाया, जब एक महत्वपूर्ण आयोजन में कथा करने वाली कलाकार नहीं आईं। उस दिन मिथलेश्वरी ने पहली बार स्वयं कथा कहना शुरू किया — और वहीं से शुरू हुआ उनका नया अध्याय। अब वह न केवल भजन गाती हैं बल्कि रामायण कथा भी स्वयं करती हैं।

परिवार का संपूर्ण सहयोग
उनके परिवार का हर सदस्य संगीत में ही रमा हुआ है। उनके पिताजी, माताजी, भाई और छोटी बहन योगेश्वरी सेन — सभी संगीत से जुड़े हैं। यह संगीतमय वातावरण ही उनके समर्पण और निखरते कौशल की सबसे बड़ी प्रेरणा रहा है।
पहला स्टेज परफॉर्मेंस
मंच पर पहली प्रस्तुति उन्होंने बहुत ही कम उम्र में दी थी। तब से लेकर आज तक वह लगातार मंच पर प्रस्तुति देती आ रही हैं, और हर बार अपने दर्शकों के दिलों में भक्ति और भावनाओं की लहरें जगा देती हैं।सपने और उद्देश्य
मिथलेश्वरी सेन का सपना है कि रामायण की दिव्यता, भक्ति, ज्ञान और समर्पण हर घर, हर व्यक्ति तक पहुँचे। वे छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत और भक्ति संगीत को देश-विदेश तक पहुँचाकर अपनी संस्कृति का गौरव बढ़ाना चाहती हैं।

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