90 दिनों से गायब थाना सीतापुर के बेलजोरा निवासी दीपेश उर्फ संदीप लकड़ा का शव ग्राम लूरेना बड़वापाट में जल जीवन मिशन का ठेकेदार अभिषेक पांडेय के साइड में बनाये गये पानी टंकी के नीचे दबा मिलता है।

बहुत ही गंभीर मामला है फिर से प्रदेश में आदिवासी भाई की जघन्य हत्या हुई है। राजमिस्त्री जो ठेकेदार के अंदर में काम करने वाला है, को चोरी के इल्जाम में फंसाकर घर वालों को धमकी दिया जाता है, पुलिस प्रशासन कुछ नहीं करती है। अपहरण किया जाता है तब भी पुलिस प्रशासन कुछ नहीं करती है। गांव वाले प्रदर्शन करते है उसके बाद चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज होता है। उनका अपहरण कर मार दिया जाता है। मारने के बाद जघन्य अपराध को छुपाने के लिये ठेकेदार द्वारा टंकी का निर्माण किया जा रहा था उस टंकी के लगभग 15 से 20 फीट नीचे उसको गाड़ दिया जाता है और उसके ऊपर टंकी का निर्माण कर दिया जाता है। 3 महिना के बाद भी पुलिस प्रशासन कार्यवाही नहीं करती है। हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद एफआईआर होता है उसके बाद पुलिस प्रशासन संज्ञान में लेती है और फिर कार्यवाही करती है। ठेकेदार के द्वारा लगातार गुमराह किया गया। पुलिस प्रशासन के सहयोग से मृत्य व्यक्ति के मोबाइल को अन्य शहरों में ले जाकर ट्रेस कराना और इस शहर में उनका लोकेशन बताना प्रशासन की भूमिका पर सवाल है। यह भी जानकारी है कि ठेकेदार के अकाउंट से इस तीन महिने के दौरान आनलाईन करोड़ों रू. का लेनदेन हुआ है। मतलब साफ है इस मामले को दबाने के लिये, इस मामले को गुमराह करने के लिये, इस मामले को लीपा-पोती करने के लिये करोड़ो रू. का लेनदेन हुआ है। इसकी निष्पक्षता से जांच करनी चाहिये। आदिवासी समाज लगातार आक्रोशित है। लगातार आंदोलन कर रहे है न्याय की मांग को लेकर। आदिवासी समाज ने मांग किया है मृत परिवार को 2 करोड़ रू. मुआवजा मिलना चाहिये। साथ ही इस मामले को सरकार को गंभीरता से जांच करनी चाहिये। जो दोषी है उनको कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिये। लेकिन सरकार जिस गति से एफआईआर दर्ज करने में लेतलतीफी कर रही है अपराधियों को बचाने का काम कर रही है ये प्रदेश के आम नागरिक के लिए सबसे बड़ा चुनौती भरा हुआ है।

